Sunday, 29 January 2017

जुदाई/विरह

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*स्पर्धेसाठी*
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*विषय:- जुदाई/विरह*
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जुदाई में तेरी हरवक्त
तकलीफ में रहना।
नियतीने छळले मजला
प्रिये का कळेणा.


आँखे भी नमसी हो गई,
तेरी बाते सुनसुनकर।
तुझीच वाट पाहत आहे,
माझी हि वेडी नजर.


जुदाई ने तेरी जाने
क्या क्या सिखा दिया।
विरहात अश्रूंनी तुझ्या
मला घायाळ केले प्रिया.


                       ✍🏻गजेंद्र....
              ढवळापुरीकर औरंगाबाद

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