Tuesday, 3 January 2017

बेइमान थे ओ लोग...

बेइमान थे ओ लोग
जो प्यार को समज ना सके।
प्यार करने वालो की
गलतियाँ सुलझा न सके।

चंद लम्हे तेरी बाहो में
हमने प्यारसे गुजार क्या दी।
ओ खुदको दिल से
रुला और हँसा न सके।

खेद भी अंदर से होता है
जबसे चुभने लगी उनकी बातें ।
हमने प्यास अपनी दबा ली
मगर ओ हमको उलझा न सके।

___________कवि:-गजेंद्र काले
_____________ संभाजीनगर

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